Saturday, August 22, 2009

एक उम्र के बाद ....


उत्तमा !! अंधेरे उजाले की बात मत करो , मुझे डर लगता है । देखो तो , लोग चलते -चलते ही गिर पड़ते हैं । अरे !! कैसी बात करती हो बिना चले ही गिर सकते हैं । गिरने के लिए कुछ करने की जरूरत नही है बस , विचारों के गिरते ही सब कुछ गिरने लगता है । हाँ , तुम ठीक कहती हो , लेकिन सुनयना !! गिर कर उठना भी कोई आसान बात नही है । जवानी के जोश मैं होश खोने को तो हर कोई तैयार रहता है , पर जो गलतियों से सबक लेता है , वही सच्चा इन्सान है ।

उत्तमा !! देखो तो खिड़की से पानी रिसकर अन्दर आ रहा है । जो बादल शाम को बिखरे हुए थे अब , एकजुट हो गए हैं । जब , कण -कण जुड़कर टकराया होगा तब , बरसने के अलावा कोई चारा भी तो नही । एक बार मैं , बरसात के मौसम में अपनी ससुराल गई थी । तुम सुन रही हो न !! हाँ , बोलो न , नेहरू नगर की दिन रात चलने वाली सड़क जरा सी बारिश में घुटने तक पानी से भर गई । काम ख़त्म करके , कमरे की खिड़की से बाहर देखने लगी , एक ठंडा अहसास सा मेरे पास बिखर गया , थोडी देर में दो नन्हे बच्चे भी मेरे पास आ गए , सड़क पर जो भी निकलता गद्दों में धम्म से गिर जाता , हम लोग ठहाका लगाकर हंसते , क्योंकि सायकिल वाले और रिक्शे वाले को पानी के भीतर गद्दे नही पता थे । रिक्शे में बैठी सवारी नीचे लुड़क जाती , इतना मजा आ रहा था , लोग छाता लगाकर बैठे होते पानी से बचने के लिए लेकिन एक झटके के साथ गिर जाते ।

हम तीनों मिलकर इतना हंस रहे थे कि पेट दुखने लगा था , कभी स्कूटर पानी में आकर बंद हो जाता , साहब को गंदे पानी से चलकर जाना पड़ता । वो दिन मैं, आज तक नही भूल पाई हूँ । हाँ , जो पानी में गिर रहे थे उनसे पूछो , कैसा लगता होगा । ठीक है जी , अब सोने का प्रयास करें क्या ? मुझे तो नींद आने लगी तुम्हारी चटपटी बातें सुनकर । थोडी ही देर में दोनो सखियाँ बिस्तर में घुस गईं । घर जाकर उन्हें फ़िर से मस्ती करनी थी ।

एक नए सफर की मनमोहक कल्पना के साथ उनका यादगार सफर जारी रहेगा ।

रेनू ....

11 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

Badiya.Yaadgaar sansmaran..

safar ke aur khubsurat pahalu ka ham intzaar karenge...

dhanywaad..

कैटरीना said...

Hamen bhi aage intejar rahega.
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

ओम आर्य said...

badhiya laga hame bhi sansmaran ka intajaar rahega......

श्यामल सुमन said...

गिर कर उठना भी कोई आसान बात नही है ।

बिल्कुल ठीक कहा आपने रेणु जी।

Atmaram Sharma said...

सही कहा आपने.

Udan Tashtari said...

उत्तम संस्मरण..सही कह रही है.जारी रखें.

Digvijay Singh Rathor Azamgarh said...

अच्छा लिखा है ................

दिगम्बर नासवा said...

SACH HAI ....... GIR KAR UTHNA AASAAN NAHI .... LAJAWAAB HAI APKA SANSMARAN .... JAARI RAKKHEN ISE ....

raj said...

achhi post...........

Anonymous said...

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