Friday, August 14, 2009

एक उम्र के बाद ....


सुनयना !! देखो तो , ट्रेन रुक गई है , हाँ , यहाँ तो जंगल नज़र आ रहा है , तभी पीछे वाली बोगी से पकडो -पकडो की आवाज आने लगी , लाइन के किनारे किसी के भागने की आवाज भी आ रही है , उत्तमा !! ऐसा लगता है किसी को पकड़ कर धुना जा रहा है , मुझे लगता है जरूर कुछ लेकर भगा होगा , हाँ , हो सकता है ।

उत्तमा !! पता है एक बार मैं , अकेली माँ से मिलकर वापस आ रही थी , सामान जादा नही था , एक बैग के अलावा एक झोला था जिसमें कुछ मिठाई के डिब्बे , बूरा जो आगरा में मिलता है , उसके लड्डू बहुत अच्छे बनते हैं , हाँ , अब आगे भी कुछ बताओगी या खाने पीने की बातें ही करती रहोगी । सुनयना तुम , पका देती हो , अरे !! सुनो तो , हम सभी लोग लाइट बंद कर सो गए थे । मैंने अपनी चुन्नी झोले के ऊपर ही रख दी थी । ऊपर वाली बर्थ पर एक लड़का आकर लेट गया , उसके ऊपर एक नई नवेली दुलहन लेटी थी , उसके ससुरजी सामने वाली बर्थ पर लेते हुए सभी पर नज़र लगाये हुए थे । खासकर जबसे वो लड़का आकर लेटा था ।

दस मिनट ही हुए थे कि बुजुर्ग जोर से चीख पड़े , क्या करता है ? साला चोरी करता है , लड़का भागने की कोशिश करने लगा , पकडो -पकडो का शोर हो गया । मैं, जब घबराई सी बैठी तब वे बोले - मैडम !! आपका सामान ले कर जा रहा था , बोगी में हलचल मच गई , कोई बोला मेरा पर्स गायब है , किसी का कुछ सामान , लड़का चलती ट्रेन से उतरने लगा , बुजुर्ग ने पकड़ा और दो चार हाथ जमा दिए , वो झूट गया ,और भागने लगा , लोग नीचे उतर गए फ़िर पकड़ कर धुनाई की , लेकिन तब तक ट्रेन चलने लगी और सब लोग वापस आ गए । आगे जाकर ट्रेन फ़िर रूक गई क्योंकि किसी दूसरे डिब्बे से उसने जंजीर खींच दी थी ।

ओह !! फ़िर क्या हुआ ? वो लड़का आया उसने बुजुर्ग के सर पर एक पत्थर मारा और भाग गया , गनीमत थी कि पत्थर पहले खिड़की में लगा फ़िर उन्हें लगा , बेचारे तिलमिला गया । बोगी के लोग फ़िर नीचे भागे लेकिन तब तक फ़िर ट्रेन चलने लगी ।

बुजुर्ग ने मेरी ओर देखा बोले - मैडम !! आपकी वजह से सब हुआ , मेरा सिर भी फूट गया , उनकी बैचेनी मैं समझ रही थी , तभी जी .आर. पी . का सिपाही आ गया , जब उसे बताया तो बोला - मेरी ड्यूटी ख़तम हो गई है , एक बोगी में सिपाही सो रहे हैं , आप चलिए , उनसे बात कर लेना । मैं, उसकी धूर्तता पूर्ण बात सुनकर सन्न रह गई , उसका नाम ओर नम्बर मैंने नोट कर लिया , उसी के सामने फोन लगाने लगी , कुछ घबराहट उसकी बढती नज़र आई , मैडम !! मैं उन्हें भेजता हूँ । आप बात कर लेना । दस मिनट बाद एक हत्ता कट्टा सिपाही हाजिर हो गया , क्या हुआ ? बुजुर्ग ने पूरा वाकया बता दिया ।

थोडी देर तक उसकी लेफ्ट -राइट होती रही , उसे धमकी देते हुए कहा कि यहीं बैठे रहना । मरता क्या न करता सिपाही वहीं बैठा रहा , बुजुर्ग को थोडी रहत मिली । कुछ देर बाद वे अपनी पुत्रवधू के साथ उतर गए । अचानक हुए इस हादसे से मुझे आघात लगा । हाँ जी , बात ही ऐसी थी । मेरे तो रोंगटे खडे हो रहे थे तुम , बोलती जा रहीं थीं । यार !! तुम्हारा हौसला देखकर तो सैलूट मारने को जी करता है । तो मारो न !! किसने मना किया है । ठीक है अब , हो गया । पता है , मैं , होती तो डर कर रो देती । तुमने फोन किसे लगाया था , पति महाशय को । सच है , यदि आत्म विश्वास कमजोर पड़ जाय, तो सब काम बिगड़ सकते हैं । हाँ, एक उम्र के बाद ..... मैं भी यही सोचने लगूंगी कि अकेली निकलूँ या नहीं .हमारे युवा अति आत्मविश्वास के चलते गलतियाँ कर बैठते हैं । हाँ , तुम ठीक कहती हो ।

सुनयना !! कुछ खाना है , भूंख लगी है, नही । उत्तमा !! कैसा लगता है , हम लोग इस उम्र में भी मस्ती करते हैं । और हाँ , सुनो तुम्हारी धरती घूम रही है । क्या है ? शाम तक तो सब भाग रहा था , अब सब कुछ दूर जलती रौशनी के साथ ही घूम जाता है । पता है उत्तमा !! जब हम पद्मासन लगाकर बैठते हैं तब भी , बंद आंखों में एक दिया सा जलता है और अंधेरे में विलीन हो जाता है .....

क्रमश : ....

रेनू ....

2 comments:

दिगम्बर नासवा said...

कहानी का प्रवाह अच्छा चल रहा है...........अगली kadi की pratiksha rahegi

विपिन बिहारी गोयल said...

उत्तम रचना के लिए साधुवाद

तेज धूप का सफ़र