Thursday, January 15, 2009

हेर -फेर का फेर

प्रात : वन्दनीय गुरु देव कहते हैं कि " किसी भी महान सफलता के पीछे हजारों छोटे -छोटे अपराध शामिल रहते हैं "।
कहने का आशय है कि व्यक्ति शीघ्रता से कुबेरपति बनना चाहता है और अतिमहत्वाकंछा के चलते न जाने कितने जतन करता है ,जो हमेशा सत्कर्म ही नही होते हैं । आधुनिक अर्थ युग में व्यक्ति सिर्फ़ अर्थार्जन के लिए बेकल होता दिखाई देता है । बड़े स्तर पर बड़ी -बड़ी कम्पनियाँ चलाने वाले चतुर , एकाउनटेंट धन की सरेआम हेरा -फेरी कर विशाल व्यापारिक साम्राज्य तो खड़ा कर लेते हैं , पर इस कपट को अधिक समय तक छुपा कर नही रख पाते ।
धन का लालच व्यक्ति को पतन गामी ही बनाता है, यह सत्य है । जब पृथिवी पर व्यक्ति या कहें कि किसी भी प्राणी का जीवन अस्थिर है , उसे कभी भी इस ग्रह को छोड़ कर जाना पड़ सकता है , फ़िर भी धन का अम्बार किस लिए ?
तब कहा जा सकता है कि हर इन्सान एक समान नही हो सकता ।
कहा जाता है कि पुत्र मोह में अपने जमे-जमाये कारोबार को पलीता लगाने का काम बड़ी कंपनी ने किया और नतीजा अत्यधिक अपमानजनक और आर्थिक नुकसानदायक सिद्ध हुआ । दुनिया भर का झमेला जान से लगा सो अलग । इसी तरह हर बड़े घरानों के साथ कुछ न कुछ विवाद लगे रहते हैं , कभी वसीयत के लिए लड़ते हैं , कभी व्यापार के लिए और कभी राजनीति के लिए मनमुटाव पैदाकर लेते हैं । कभी माँ किसी प्रतिष्ठित राजनीतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण करती है , कभी बेटा किसी दूसरी , बहन किसी तीसरी पार्टी में जगह बनाती है और इस तरह कहीं न कहीं से फायदों की घुसपैठ बनी रहती है ।
व्यापारिक घराने राजनीतिक पार्टी और क्षेत्र में रक्तवाहिनी नलिका की तरह प्रयोग किए जाते हैं , यहाँ दोनों ही का स्वार्थ बनता है । जिस नेता मंत्री से पटरी बैठ जाए, बस हो गई नैया पार । व्यवसायिक भूमि का अधिग्रहण आसानी से होता है , कर चुकाने में छूट भी मिलती है , नेता जी को शुद्ध लाभ की दक्षिणा के रूप में चंदा भी बड़ी ईमानदारी से मिलता है । यदि व्यवसायिक हस्तियों का हस्तक्षेप राजनीती में भी होता है , तब किसी महत्वाकान्छी कुर्सी के लिए इन्हीं के द्वारा आग सुलगाई जाती है । समर्थन की सब माया है । जहाँ समर्थन मिला, विरोधियों के हौसले पस्त हो जाते हैं । गलियों में भोंकने वाले एक दिन नगर -निगम द्वारा कारावास में ठूंस दिए जाते हैं । मालिक चाहे तो पसंद करके , कुछ रकम चुकाकर वापस फ़िर गली में छोड़ दे । कुछ भी नही कहा जा सकता ।
देश में इस कदर लूट- पाट चल रही है कि कभी लगता है कि अराजकता ही फ़ैल जायेगी । कभी कुछ बहुरूपिये हत्यारे एकजुट होकर दहशत फैलाते हैं , इंसानियत के बीच नंगा -नाच दिखाकर कत्लेआम करते हैं । सब लोग हतप्रभ हो तमाशा देखते रह जाते हैं । सरकार विचार करने में ही महीनों लगा देती है कि दुश्मनों को सबक सिखाना है या नही । जनता का भरोसा ही उठने लगता है । सब जानते हैं कि कूटनीति के तहत कदम उठाये जाते हैं । कुछ विरोधी नेता शहीदों की शहादत पर ही प्रश्न चिन्ह लगा देते हैं । कितने शर्म की बात है शहीदों की विधवा स्त्रियों को पूरे देश के सामने चीख -चीख कर कहना पड़ा कि मेरा पति कैसे मरा । लानत है , ऐसे इंसानों पर , जो मृत्यु पर भी भरोसा नही करते , अपनी अमरता को पक्का सोचते हैं , जीवित रहने का भ्रम उन्हें जीते जी मार देता है ।
क्या , बखिया उधेडी जाए इस समपन्न राष्ट्र की । हर तरफ़ एक काला साया सा मडराता है । उनकी संपन्नता की रौशनी किसी तेल -बाती से नही बल्कि रक्त -वसा से जलती है , ठग विद्या , जालसाजी से जलती है । इस हेर फेर के फेर को समझना कोई आसान काम नही है , ईश्वर सबको सदबुधि दे ।
रेनू शर्मा .....

1 comment:

विनय said...

बहुत ख़ूब

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आप भारत का गौरव तिरंगा गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने ब्लॉग पर लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
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