Friday, November 14, 2008

अजब - गजब प्रचार

नेता जी कई बार जीत चुके हैं , फिरभी इतने नापसंद किए जातें हैं कि व्यापारी जन चुनाव क्षेत्र मैं उनका स्वागत करने के लिए तैयार ही नही , जब उनके चमचों ने बाजार का दौरा किया तो सूनापन दिखाई दिया , व्यापारियों का मन ताड़ लिया गया , कुछ समय बाद पचास गैंदे कीमाला लाकर बाजार मैं बाँट दी गई , भइया नेता जी आ रहे हैं कृपया उनका स्वागत कर देना , माला पहना देना यार क्या जाता है , दस मिनट मैं नेता जी उम्मीदवार की पोशाक पहनकर हाथों को जबरदस्ती जोड़ते हुए , रोनी मुस्कान उडाते हुए नेता जी आगे बडे तो दो चार दुकान दारों ने एक साथ माला पहना दी , नेता जी तो लगातार कैमरा देख रहे थे , व्यापारी नेता की आंखों मैं उतरने का प्रयास कर ही रहे थे कि कार्य - करता द्वारा हटा दिए गए । प्रायोजित तमाशा निबटते ही यह कर्म पूरे बाजार मैं चलता रहा , लोग नेता जी की नाटकीयता पर हँसते रहे , दुकादारी ठप्प होने के लिए उन्हें कोसते हुए अपने काम मैं मशगूल हो गए ।
एक पूर्व मुख्य मंत्री नव आगुन्तक उम्मीदवार का प्रचार करने के लिए सभा कर रहे थे , सभा मैं उनकी पार्टी से अधिक बिरोधी सक्रीय थे । मंत्री जी ने जैसे ही उम्मीदवार की शान मैं कसीदे पड़ने शुरू किए , लोगों ने अंडे फैंक कर उनका बोलना हरम कर दिया , दूसरी पार्टी की नीतियों की आलोचना बिरोधियों को कहाँ हजम होने वाली थी तो , सडे अंडे फैंक दिए गए , मंत्री जी दुम दवा कर भाग लिए ।
एक उम्मीदवार महिलाओं से मिलने उनकी चौखट पर दस्तक दे रहे थे , महिलाएं भी बेहद खुश थीं , मालाएं आ चुकीं थीं , कुछ महिलाओं के पति भी वहीं थे तो उन्होंने नेता को माला डालने से मना कर दिया , कुछ ने कहकर डलवा दी , एक दलित महिला ने माला डाल दी तो नेता जी ने उत्साह वश माला वापस उसे पहना दी , अब क्या था , कैमरे खटक गए , पूरा उत्सब ठहाकों मैं बदल गया , नेता जी अब तो वादे निभाने ही पड़ेंगे लोग बोलने लगे ।
जारी रहेगा यह क्रम .........
रेनू शर्मा .......

1 comment:

alpaansh said...

भारतीय लोकतंत्र किसी बड़े सिनेमा की तरह है इसमे सभी प्रकार का मसाला होता है एक रंग ये भी है ...सभी नेताओं को आपने लाफ्टर शो का किरदार बना दिया है ...