Monday, August 11, 2008

कैसा सोना ?

हम भारतीय बड़ी -बड़ी बातें करतें हैं ,आधी से अधिक आबादी शहरों की ओर पलायन कर रही है । हमारी बेसिक आब्श्यकताएं जड़ बन गई हैं । शहरों मै स्कूल ,विद्यालय ,असामान्य रूप से अपूर्ण हैं ,वहाँ - पानी ,पढने , खेलने ,शौच आदि की बुनियादी सुबिधायें भी नहीं हैं । यह स्थिति तो शहरों की है फ़िर गाँव का क्या हाल होगा आप स्वयम ही जान सकतें हैं ।
जब भी कोई इन्सान विश्व कीर्तिमान बनाता है ,हमारे सपने विशाल हो जाते हैं , हम कूदने - फांदने लग जाते हैं , लोग खुशी मै पागल हो जाते हैं ,सरकारें उसकी झोली भरने लग जातीं हैं । क्या ये लोग कभी सोचतें हैं की जो पैसा लुटाया जा रहा है उससे किसी स्कूल का सुधर किया जा सकता है । तेज हवा के तूफ़ान सा झोंका आता है ,सब मतवाले हो जातें हैं , उन्हे पता भी नही रहता की क्या खेल और क्या राजनीति ,क्या व्यापार ?? बस हल्ला मचाने के पैसे मिल जाएँ उन्हें और क्या चाहिए ।भारत मै कुछ भी आसन नन्ही । जो लोग ओलम्पिक क्वालीफाई करतें हैं , वे लोग भी खेल को गंभीरता से नही लेते ,अगर सवाल खड़े करो तो सरकार पर आरोप लगा देतें हैं ।
हम युवायों को खेल के नाम पर सपने दिखाना शुरू कर देतें हैं , कभी हॉकी मै ,कभी फुटबॉल मै ,कभी टेनिस मै ,कभी क्रिकेट मै कितने लोग शीर्ष तक पहुँच पाते हैं । हमारा व्यापारी वर्ग भी उन्हीं लोगों को सलाम करता है जो पहले से ऊंचाई पर हैं । क्या कभी किसी मजदूर के बेटे को किसी ने ऊपर उधने की हिम्मत दिखाई ? नही !दौलत हर काम मै बाधा बन जाती है । भारत मै हर बात को राजनीति के नजरिये से देखा जाता है । कोई विषय उछला नही की कोई न कोई राजनीतिक दल आकर संबल देने लगता है
स्कूलों की जरूरतों पर किसी ने ध्यान नही दिया ,क्या वहाँ आकर सिर्फ़ खाना खा लेने से सब लोग शिक्छित हो जायेंगे ? गरीबों , मजदूरों .को जब तक काम नही मिलेगा तो उनके बच्चे कैसे स्कूल जा पाएंगे । हमारे गुरूजी को नही पता होता की गाँव के बहार क्या चल रहा है ? हमारी शिक्षा पध्यति पुराने दर्रे पर चल रही है उसे बदलने की जरुरत है ।
हमने अपने विकास का स्वयं ही पतन किया है , आरक्षण का कोढ़ यदि न बोले तो आज फसल हरी भरी होती , ज्ञानियों और शिक्छितों से भंडार भरा होता ,हमें बाहर ताकना नही पड़ता । नैतिक मूल्य हर पल गर्त मै जा रहें हैं । भारतीय संस्क्रती का हस्र होता जा रहा है , विद्यार्थी अपने अध्यापकों के प्रति सम्मान प्रदिर्शित नहीं करते , क्यों कि शिक्छा भी व्यापार का अंश बन गया है । हर कोने पर एक टूशन पॉइंट दिखाई पड़ता है । अधिकाँश बच्चे स्वतः ज्ञान ग्रहण करतें हैं क्यों कि स्कूल , कवालेजों मै पढ़ाई से अधिक राजनीति का दखल होने लगा है ।
स्वर्ण बिजेता शूटर अभिनव बिंद्रा बधाई के पात्र हैं । इसमे कोई शक नहीं , लेकिन उनके वैभव का प्रदर्शन होने से कोई भी भारतीय खिलाड़ी या उसके माता - पिता ओलम्पिक तो क्या राजकीय स्तर पर भी बच्चे को नहीं भेज सकता क्यों कि माता - पिता किसी तरह घर का खर्च चलतें हैं , चाहतें हैं कि बच्चा पढ़ लिख कर नौकरी करे चार पैसे घर मै लाये तो स्थिति सुधरे न कि जीवन भर का सुखः चैन और कमाई खेल के खेल मै झोंक दे । यही कटु सत्य है । अमीरों के चोचले हैं , उन्हीं के आगे - पीछे यह सोना धुमेगा , गरीब बच्चों को जायदा बड़े ख्याब न दिखाएँ वरना डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है ।
यूवा पीढी का हौसला , जज्वा , हिम्मत , साहस सब धराशाई होता है ,जब खेल तैयारी के लिए , लाखों , करोड़ों की बात होती है । भारतीय आम नागरिक तो तमाशा ही देखेगा क्यों कि न होगा बांस और न बंशी बजेगी । जब कोई बन्दा दुनिया के पटल पर नाम लिख लेता है तब हर कोई चिल्लाता है अरे !! फलां व्यक्ति ने हमारा नाम रोशन कर दिया , यह उसका स्कूल है , यहाँ वो सोया था , अगर वाही चार पैसे की मांग कर देता तो सब पल्ला झाड़ लेते ।
हम अपनी शिक्छा पध्यति को तो सुध्हर नहीं पाये , बच्चों को स्वस्थ नही कर पाये , स्त्रियों को सुरक्छा नही दे पाये ,वे कैसे बात कर पाते हैं सोने और चांदी की । विश्व मंच पर भारतीय परचम फहराना अकेले उस बन्दे की बिसात थी जो वहाँ तक पहुँचा भी ।
अभिनव के लिए कोटि शह शुभकामनाएं । हमें नाज है की भारतीय राष्ट्र गान को दुनिया के खेल मेले मैं गुंजायमान कर दिया ।
रेनू शर्मा

7 comments:

श्रद्धा जैन said...

Renu ji aapko padha sabse pahile to aapka sawagat hai blogging main

aur aapke vicharon se bhaut prabhavit hoon
aage bhi aapko padhne ka intezar rahega

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है। स्वागत है आपका

Mrs. Asha Joglekar said...

swagat hai blog jagat men. Bada wichar prwartak lekh hai pr ab thoda to badlaw aa raha hai badi badi companiyon ka dhyan bhi khelon ki taraf ja raha hai.

vinayprajapati said...

बहुत अच्छा विषय चुना आपने, लेखन भी अच्छा है! ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है!

राजेंद्र माहेश्वरी said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है!...

"VISHAL" said...

renuji, bahut hi sateek likha hai aapne.
kripya word verification hata le to comment karne me aasani hogi.

Amit K. Sagar said...

बहुत सुंदर. लिखते रहिये.