Wednesday, November 4, 2009

अगले जनम मोहे कुत्ता ही कीजो ..

कुत्ता पूरी पृथ्वी का प्रिय जानवर है , हर घर में एक पिल्ला जो देशी या विदेशी कैसा भी हो , पतली  चेन से बंधा मिल जाता है , दरवाजे के बाहर लिखा मिल जाता है , कुत्तों से सावधान !!! अब , उनसे पूछो , कौन से कुत्ते से क्योंकि जो वफादार है ,वह तो काटेगा नहीं , सिर्फ भौंक कर हमें आगाह करेगा , लेकिन दूसरा अदृश्य कुत्ता बिना भौंके उधेड़ डालेगा . सड़कों पर , गलियों में , पार्कों में कहीं पर भी देख लो , इन कुत्तों के साथ एक आदमी बंधा हुआ घूमता मिल जायेगा . 
मुझे कुत्तों से कोई दुश्मनी नहीं है , न ही कभी , उनसे आँखें तरेरी हैं , बल्कि लाड -प्यार जो नि: शब्द हो , निशभाव  हो ,मुझे नहीं भाता. जानवर का क्या भरोसा , अभी पुँछ हिला कर स्वागत कर रहा है , कब टांग में दांत गडा दे , कहा नहीं जा सकता . यह तो , हमारे भय और संदेह कि बात थी , कुत्तों की महिमा अगर सुननी है तो , ऐसे घर में चले जाओ , जिसकी मालकिन कुत्ता संभालती हो . बस , कुत्ता कांड शुरू होकर उसके अध्याय चालू हो जाते हैं , आप जिस उद्देश्य को लेकर घर में घुसे हो , वह तो बाहर ही नदारत हो जाता है . आप भागने की जुगत लड़ाने लगेंगे . पहले तो घर में घुसना ही मुश्किल हुआ था , अब , भौंकने की आवाज से ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं . वो तो , भला हो साहब का आते ही बोल दिया अरे !! डरो मत , काटेगा नहीं , बस डराता है .अब , इन्हें कौन बताये कि अगर पहचानता तो आफत ही कर देता . 
कभी  -कभी में असहज हो उठती हूँ , अपने बच्चों का पालन धाय के हाथों करने वाली , बच्चे को स्तनपान भी नहीं करतीं क्योंकि फिगर के ख़राब होने का भय रहता है . लेकिन कुत्ता गोद में लेकर , उसे खाना खिलाती हैं , उसकी छीछी , फूटू सब दौड़कर साफ़ करतीं हैं , जानवर ही उन्हें समझता है , प्यार करता है , और जब , घर के बुजुर्ग खाना ,पानी , दवा मांगते हैं , तब  उन्हें सुनाई भी नहीं देता है . उन्हे गलियां दी जातीं हैं , उनके शीघ्र विदाई की कामना की जाती है .पर , कुत्ते को हंसते  हुए गोद में बिठाकर लाड का पिटारा खोल दिया जाता है . 
कुत्ता  घंटों उनसे चिपका बैठा रहता है , उन्हे सुरक्षा का अहसास होता है , लेकिन मुश्किल में पड़े बुजुर्ग की लाचारी उन्हें नहीं दिखाई देती . संबेदनाओं की जरूरत किसी और को भी है . धीरे -धीरे कुत्ता उनके बिस्तर में भी घुसने लगा है , उसके बालों की परवाह नहीं है , न ही पिस्सुओं की . जब ,कोई मेहमान पूँछ लेता है , तब खुश होकर बोला जाता है , बड़ा दुष्ट है मेरे साथ ही सोता है . मुझसे बहुत प्यार है . दवा , खाना , घूमने तक कुत्ते जी के खर्चे शाही ही होते हैं . उस पर भी साहब के नखरे कि खाना गरम नहीं है . कुत्ते की महिमा अपरम्पार है .
मुझे तो लगता है की पुनर्जन्म होता ही है , कोई भी प्राणी , किसी भी योनी में आकर अपनी सेवा करा सकता है . लगता है उस व्यक्ति के कान पर जाकर चीखूं तुम इसी योग्य हो . अब , भोगो सजा . और एक दिन उसी कुत्ते की रस्सी में उलझकर आप धराशाही  भी हो सकते हैं . फिर आजीवन उपहार में मिली पीडा , दर्द , आह ,उन्ह , आउच के साथ उन कुत्ते महाशय को याद करते रहो . तो , कौन कुत्ता नहीं चाहेगा की -अगले जनम उसे कुत्ता ही बना दो , तो भी चलेगा ....
रेनू ...

4 comments:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

हम दोस्त लोग भी कॉलेज टाइम में कुछ कुत्तों के जलवे देख कर आहें भरा करते थे और सोचते भी यही थे......

Udan Tashtari said...

हे प्रभु, अगले जनम मोहे भी कुत्ता ही कीजो ..लेकिन उ पॉमेरियन वाला या फिर चिचुउआ!!


-अगर कन्डीशन न डालें तो पक्का गली का खजूरा कुत्ता बना कर छोड़ेगा भगवान...अपना इस मामले में रिकार्ड दुरुस्त नहीं है. :)

M VERMA said...

लेकिन दूसरा अदृश्य कुत्ता बिना भौंके उधेड़ डालेगा . सड़कों पर , गलियों में , पार्कों में कहीं पर भी देख लो , इन कुत्तों के साथ एक आदमी बंधा हुआ घूमता मिल जायेगा .
इन बातो से तो मुझे भी अगले जनम मे कुत्ता होने की ललक जग गयी है

दिगम्बर नासवा said...

इसी को तो दुनिया कहते हैं ........ कही संवेदनाएं मर जाती हैं ........ कहीं कुत्ते के लिए भी ख़त्म ही नहीं होती .........