Tuesday, September 15, 2009

भ्रष्टाचार तलाश कर बताओ !!!

कोई राजनेता , मंत्री या श्रेष्ठ शासकीय अधिकारी यह कह दे कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना चाहिए तो, यह वही बात होगी कि सुबह के नास्ते से ऑमलेट हटा दो , दोपहर के खाने से बटर हटा दो और रात के खाने से दही हटा दो । बस हो गया । यार !! कह किससे रहे हो , करके दिखाओ न !!
सुना है, पीऐम साब ने भी बोल दिया, कि ऐसा करना चाहिए ,क्योंकि हमारा देश भ्रष्टाचारियों की लिस्ट मैं पहले पाँच मैं आने वाला है , हमें किसी भी क्षेत्र मैं अब्बल रहने की आदत नही है । जब , ये लोग अपना मुखारबिंद खोलते हैं , तब इन्हें , ऐसा नही लगता कि क्यों अनर्गल बक रहे हैं । जबसे इस धरती पर पैदा हुए हैं तब से , यह उत्कोच लेने देने का रिवाज चला आ रहा है । उसी के कारण भ्रष्टाचार फ़ैल रहा है । जब , देश की गद्दी मैं फायवर की तरह चिपक ही गए हो तो ,सुन लो - शमशान घाट आपका रास्ता देख रहा है ,तब कहते हो कि भ्रष्टाचार से देश को मुक्त करना चाहिए । शर्म आनी चाहिए।
सात पीढियों के लिए ब्लैक ,लाल ,पीला और सफेद धन संग्रहित करने के बाद लोगों को दिखाते हैं कि हम खर्च मैं कटौती कर रहे हैं । अब , साधारण जहाज की जगह फायटर प्लेन से जन शुरू कर दिया है क्योंकि सुरक्षा के सारे साधन हैं । होटल के बजाय बंगले मैं रहना शुरू कर दिया है क्योंकि वहां अधिक लोग बिना किसी हुज्जत के दाखिल हो सकेंगे जो , चंदा दिखाकर व्रत तोड़ने के आदि हैं , आज उन्हें समझ आया है कि लोग भ्रष्टाचारी इसलिए बनते हैं क्योंकि उनकी तनखाह कम होती है , अब उनका वेतन बढ़ा देना चाहिए ।
दिन -पर -दिन महगाई लोगों का जीना हराम किए हुए है , किसी तरह परिवार पाले जा रहे हैं । रईसों की संख्या नकली नोटों की तरह बढ़ रही है , फ़िर भी करोड़ों लोग एक समय के भोजन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं , तब इन्हें कुछ समझ नही आता ? कोई भी सरकार मतदान के लिए जनता से हजारों वादे करती है लेकिन काम होने के बाद पलट कर नही देखती ,क्यों , समय पर वेतन नही बढाया जाता ? क्यों , अध्यापकों को डंडे पड़ वाये जाते हैं ? क्यों , स्कूलों की बेसिक जरूरतें पूरी नही की जातीं ? क्यों , लोगों को नौकरी नही दी जाती ? क्यों , मांग करने वालों को सड़कों पर खदेडा जाता है ? अपने लोगों से पिटवाया जाता है ? कोई भी बात सुनाने वाला नहीं है ।
हर बार राजनीति हावी हो जाती है , क्या, इस तरह हम भ्रष्टाचार को ढूंढ भी पाएंगे ? जो लोग , भ्रष्टाचार को हटाने की बात करते हैं , वे उसे खोज कर बता दें ?हम बता देते हैं - किसी नाके पर टोल टेक्स देते रहें , फ़िल्म देखने के लिए लम्बी लाइन मैं खड़े हो जायें , सब्जी लेने के लिए कभी हाट में थैला लेकर निकलें , किसी सरकारी ऑफिस में काम कराने जांय, अस्पताल में नर्स की घुड़की सह कर देखें , घर जाने के लिए मिनी बस का इंतजार करके देखें । अब , तो भ्रष्टाचार मिल ही जाएगा । अगर मिल जाय तो , उस पर अमल करके दिखा दें ।
पापी , कुकर्मी , हत्यारों को पकड़ने के बाद सरकारें उनका मुरब्बा डालकर रखती है , जनता का धन उन पर सजदा करती है । भ्रष्टाचार क्या मिटायेंगे ये लोग ? एक बार चौराहे पर खड़ा करके किसी आतंकी को फांसी पर चढा कर दिखा दो , हम समझ जायेंगे कि आप भ्रष्टाचार को तलाशने में समर्थ हो जाओगे । जब आबरू का आवरण उस ताने -बाने का बना हो , जहाँ से भ्रष्ट शब्द पैदा होता हो , तब कौन सा धागा खींचना चाहिए , बोलो !!!
इसलिए बातें जरा कम करो , कुछ करके दिखाओ , दुनिया बदलने की बात तो , हजारों लोग करते हैं ,एक इंसान को बदल कर बताओ !!!
भ्रष्टाचार बदल जाएगा यदि हम अपना वित्तीय ढांचा बदल दें तो । नोटों को हटा दो , ठीकरों को पैसा बना दो , फ़िर देखो तमाशा ...
रेनू ...

2 comments:

अर्शिया said...

सही कहा आपने, बातों से कुछ नहीं होने वाला।
{ Treasurer-S, T }

शरद कोकास said...

भ्रष्टाचार का यह सिलसिला बहुत लम्बा है .. गनीमत कि यह अब तक नैतिक मूल्य नही बना है ।